2nd PUC Hindi Textbook Answers Sahitya Gaurav Chapter 6 चीफ़ की दावत

   

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Karnataka 2nd PUC Hindi Textbook Answers Sahitya Gaurav Chapter 6 चीफ़ की दावत

चीफ़ की दावत Questions and Answers, Notes, Summary

I. एक शब्द या वाक्यांश या वाक्य में उत्तर लिखिए :

प्रश्न 1.
चीफ़ की दावत किसके घर पर थी?
उत्तर:
चीफ़ की दावत मिस्टर शामनाथ के घर पर थी।

प्रश्न 2.
शामनाथ की पत्नी ने माँ को कहाँ भेजने के लिए कहा?
उत्तर:
शामनाथ की पत्नी ने माँ को पिछवाड़े वाली सहेली के घर भेजने के लिए कहा।

प्रश्न 3.
शामनाथ माँ को कौन-से रंग के शलवार-कमीज़ पहनने के लिए कहते हैं?
उत्तर:
शामनाथ माँ को सफेद कमीज और सफेद शलवार-कमीज़ पहनने के लिए कहते हैं।

प्रश्न 4.
माँ के सब ज़ेवर क्यों बिक गए थे?
उत्तर:
माँ के सब जेवर शामनाथ की पढ़ाई के लिए बिक गए थे।

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प्रश्न 5.
माँ क्या टाल नहीं सकती थी?
उत्तर:
माँ बेटे के हुकुम को नहीं टाल सकती थी।

प्रश्न 6.
मेम साहब को क्या पसंद आये थे?
उत्तर:
मेम साहब को पर्दे, सोफा-कवर का डिजाइन तथा कमरे की सजावट आदि पसंद आये थे।

प्रश्न 7.
सभी देसी स्त्रियों की आराधना का केन्द्र कौन बनी हुई थी?
उत्तर:
सभी देसी स्त्रियों की आराधना का केन्द्र चीफ़ कि पत्नी बनी हुई थी।

प्रश्न 8.
माँ क्या गाने लगी?
उत्तर:
माँ एक पुराना विवाह का गीत गाने लगीं – हरिया नी मायँ, हरिया नी भैणे हरिया तें भागी भरिया ह!

प्रश्न 9.
किसने पार्टी में नया रंग भर दिया?
उत्तर:
माँ ने पार्टी में नया रंग भर दिया।

प्रश्न 10.
चीफ़ साहब बड़ी रुचि से किसे देखने लगे?
उत्तर:
चीफ़ साहब बड़ी रुचि से फुलकारी को देखने लगे।

प्रश्न 11.
चीफ़ साहब की खुशामद करने से शामनाथ को क्या लाभ हो सकता था?
उत्तर:
चीफ़ साहब की खुशामद करने से शामनाथ की तरक्की हो सकती थी।

प्रश्न 12.
माँ मन-ही-मन किसके उज्ज्वल भविष्य की कामनाएँ करने लगीं?
उत्तर:
माँ मन-ही-मन अपने बेटे शामनाथ के उज्जवल भविष्य की कामनाएँ करने लगी।

II. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

प्रश्न 1.
शामनाथ और उनकी धर्मपत्नी ने चीफ़ की दावत के लिए सुबह से क्या-क्या तैयारियाँ की?
उत्तर:
घर में चीफ़ की दावत थी तो शामनाथ और उनकी पत्नी को पसीना पोंछने की फुर्सत न थी। कुर्सियाँ, मेज तिपाइयाँ, नैपकिन, फूल सब बरामदे में पहुँच गये। ड्रिंक का इन्तजाम बैठक मे किया गया। घर का फालतू सामान अलमारियों के पीछे और पलंगों के नीचे छुपाया गया। परदे, सोफा कवर बदल दिए गए। उनकी पत्नी और माँ क्या पहने यह भी तय हुआ। इसतरह सुबह से उनके घर में तैयारियाँ चल रही थी।

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प्रश्न 2.
शामनाथ और उनकी धर्मपत्नी माँ को लेकर क्यों चिंतित थे?
उत्तर:
शामनाथ और उनकी धर्मपत्नी माँ को लेकर चिंतित थे। घर में चीफ़ की दावत थी श्यामनाथ को डर था। कही माँ के कारण उसे लाज्जित न होना। पडे। पहले तो वह उसे कही भेज दे या छिपाने की बात सोचता है। फिर माँ को सिर से पाँव तक देखते हुए सफेद कमीज, सलवार पहनकर दिखाने को बोलता है। हाथ में कुछ चूड़ियाँ बूडियाँ हो तो पहनने के लिए कहता है बरामदे में कोठरी के बाहर उसे कुर्सी पर बैठने को कहता है। कोठरी में भी उसे न सोने की सलाह देता है क्योंकि माँ को जोर-जोर से खर्राटे लेने की आदत थी। माँ को वह नंगे पाँव घूमने की मनाई करता है। वह खड़ाऊँ भी न पहनने की ताकीद देता है।

प्रश्न 3.
चीफ़ की दावत के समय माँ की मनोदशा का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
शामनाथ की माँ सुबह से घर में चली तैयारी देख रही थी, उसका दिल घड़क रहा था। सोच रही थी बेटे के दपतर का बड़ा साहब घर पर आ रहा है, सारा काम सुभीते से चल जाए। शामनाथ जब उसे बरामदे में बैठने को कहता है वहाँ से गुसलखाने के रास्ते कोठरी में जाने को कहता है तो अवाक हाकर बेटे का चेहरा देखने लगी। खर्राटे की बात सुनकर लज्जित भी हुई। अचानक सामना जब चीफ़ से हुआ तो वह बहुत हडबडाई उससे भी जादा वह अपने बेटे के गुस्से से डर रही थी। बेटे ने जो कपड़े पहनने के लिए कहे थे वह पहनकर भी आई थी। कोठरी में बैठे वह रोती रही। आँखो से ठीक से न देख पाते हुए भी अपने बेटे के तरक्की की बात सुनकर फुलकारी भी बनाने का वादा करती है, वह माँ दिल-ही-दिल में बेटे के उज्जवल भविष्य की कामनाएँ करने लगी।

प्रश्न 4.
बरामदे में पहुंचते ही शामनाथ क्यों ठिठक गये?
उत्तर:
बरामदे में पहुंचते ही शामनाथ सहसा ठिठक गये। जो दृश्य उन्होंने देखा उससे उनकी टाँगें लड़खड़ा गयी और क्षण-भर में सारा नशा हिरन होने लगा। बरामदे में ऐन-कोठरी के बाहर माँ अपनी कुर्सी पर ज्यों-कि-त्यों बैठी थीं मगर दोनों पाँव कुर्सी की सीट पर रखे हुए और सिर दायें से बायें और बायें से दायें झूल रहा था और मुँह में से लगातार गहरे खर्राटों की आवाजें आ रही थीं। जब झटके से नींद टूटती तो सिर फिर दायें से बायें झूलने लगता। पल्ला सिर पर से खिसक गया था, और माँ के झड़े हुए बाल आधे गंजे सिर पर अस्त-व्यस्त बिखरे हुए थे।

प्रश्न 5.
चीफ़ और माँ की मुलाकात का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
बैंठक से उठकर खाने के लिए जा रहे चीफ़ की नजर जैसे ही शामनाथ के माँ पर पड़ी उन्होंने माँ को नमस्ते कही फिर दाँया हाथ आगे बढाकर हाउ डू तू डू कहा दाँए हाथ में माला होने कारण माँ ने बाथों हाथ आगे किया। जब शामनाथ ने कहा कि उसकी माँ गाँव की है तो चीफ़ ने उन्हे गाँव के लोग बहुत पसंद है कहते हुए माँ को गाने का आग्रह किया। तो माँ ने एक पुराना विवाह गीत भी गाया। साहब ने बहुत तालियाँ पीटी। साहब ने पंजाब के गाँव की दस्तकारी के बारे में पूछा तो साहब को दिखाने वह पुरानी फुलकारी ले आई। पूरे समय वह धबराई और डरी हुई थी क्योंकि उसे अपने बेटे के क्रोध का पता था। लेकिन चीफ़ ने उससे मिलकर बहुत खुश था।

प्रश्न 6.
माँ को आलिंगन में भरकर शामनाथ ने क्या कहा?
उत्तर:
चीफ के कहने पर माँ की असहनीय स्थिति को जानकर भी मिस्टर शामनाथ स्वार्थवश होकर अपनी तरक्की के लिए माँ को फुलकारी बनाने के लिए मजबूर करता है। जैसे ही दावत हुई, सारे मेहमान जा चुके, तो काफी देर होने के बावजूद भी शामनाथ ने माँ की कोठरी में जाकर उसे आलिंगन में भरकर कहा कि – ‘ओ अम्मी! तुमने तो आज रंग ला दिया! साहब तुमसे इतना खुश हुआ कि क्या कहूँ? ओ अम्मी! ओ अम्मी!’ बेटे की स्वार्थी भावना देखकर माँ की आँखों में आँसू आ गए।

प्रश्न 7.
चीफ़ साहब पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
चीफ़ एक अंग्रेज अधिकारी है और वह शामनाथ के घर पर दावत के लिए आने वाला है। इसलिए स्वागत हेतु पति-पत्नी एड़ी-चोटी का जोर लगाकर एक कर देते हैं। उनकी दृष्टि में मेहमान के सम्मुख माँ एक अवरोध है, परन्तु चीफ साहब माँ को देखते ही ‘नमस्ते’ कहते हैं। उनका हाल-चाल पूछते हैं। घर की सजावट से प्रसन्न होते हैं। माँ की ‘फुलकारी’ को बहुत पसंद करते हैं। उसकी मांग भी करते हैं। चीफ़ को गाँव के लोग अधिक पसंद हैं।

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प्रश्न 8.
शामनाथ की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
शामनाथ को पत्नी की बात भी माननी पड़ती है और माँ का ख्याल भी रखना पड़ता है। पत्नी की बात सुनकर कभी-कभी माँ का अनादर भी कर बैठता है, परन्तु माँ की सहनशीलता के सामने आखिर उसको नतमस्तक होना पड़ता है। अपनी नौकरी व तरक्की के लिए अंग्रेज चीफ़ की खुशामद करना जरूरी होता है। माँ के कारण चीफ़ साहब बहुत खुश होते हैं, तो वह माँ का ‘आलिंगन कर अपने आपको धन्य मानता है।

प्रश्न 9.
शामनाथ की माँ के स्वाभाविक गुणों का परिचय दीजिए।
उत्तर:
शामनाथ की माँ भोली-भाली तथा पुरानी परंपराओं व संस्कारों वाली हैं। वह साधारण रहन-सहन वाली महिला हैं। अपनी बहू व बेटे को सम्मान भी देती है तथा उनसे कुछ डरती भी हैं। बेटे की आज्ञा का पालन भी करती हैं। बैठना, उठना, खाना-पीना तथा पहनना आदि बातों में माँ विशेष ध्यान नहीं रखती थीं। माँ के इन व्यवहारों से आधुनिकता में लिप्त बहू-बेटे को चिढ़ थी। बेटे से कभी-कभी उपेक्षित भी होती, परन्तु नाराज नहीं होती। माँ खुद कष्ट झेलकर भी बहूबेटे की मंगलकामना करती हैं।

III. निम्नलिखित वाक्य किसने किससे कहे?

प्रश्न 1.
‘माँ का क्या होगा?’
उत्तर:
यह प्रश्न शामनाथ ने अपनी पत्नी से पूछा।

प्रश्न 2.
‘जो वह सो गयीं और नींद में खरटि लेने लगीं, तो?’
उत्तर:
यह वाक्य शामनाथ की पत्नी ने पति शामनाथ से कहा।

प्रश्न 3.
‘आज तुम खाना जल्दी खा लेना।’
उत्तर:
यह वाक्य शामनाथ ने अपनी माँ से कहा।

प्रश्न 4.
‘जब से बीमारी से उठी हूँ नाक से साँस नहीं ले सकती।’
उत्तर:
यह वाक्य शामनाथ की माँ ने शामनाथ से कहा।

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प्रश्न 5.
‘सच? मुझे गाँव के लोग बहुत पसंद हैं।
उत्तर:
यह वाक्य चीफ़ साहब ने शामनाथ से कहा।

प्रश्न 6.
‘वह जरूर बना देंगी। आप उसे देख कर खुश होंगे।
उत्तर:
यह वाक्य शामनाथ ने चीफ़ साहब से कहा।

IV. ससंदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए :

प्रश्न 1.
‘इन्हें पिछवाड़े इनकी सहेली के घर भेज दो।
उत्तर:
प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘चीफ़ की दावत’ नामक पाठ से लिया गया है जिसके लेखक डॉ. भीष्म साहनी हैं।
संदर्भ : इसे शामनाथ की पत्नी ने अपने पति से कहा।
स्पष्टीकरण : शाम को मिस्टर शामनाथ के घर पर चीफ़ की दावत है। चीफ़ एक अंग्रेज थे। वे यदि इस दावत से खुश हुए तो शामनाथ को दफ़्तर में तरक्की मिलने की सम्भावना थी। इसलिए शामनाथ और उनकी पत्नी सुबह से तैयारियाँ करने में लगे हुए हैं। आखिर पाँच बजते-बजते सब तैयारियाँ खत्म हुईं। अचानक एक समस्या खड़ी हो गई – माँ का क्या होगा? पत्नी यह सुझाव देती है कि इन्हें पिछवाड़े इनकी सहेली के घर भेज दो।

प्रश्न 2.
‘चूड़ियाँ कहाँ से लाऊँ बेटा, तुम तो जानते हो, सब जेवर तुम्हारी पढ़ाई में बिक गए।
उत्तर:
प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘चीफ़ की दावत’ नामक पाठ से लिया गया है जिसके लेखक डॉ. भीष्म साहनी हैं।
संदर्भ : जब शामनाथ अपनी माँ से कहता है कि कोई चूड़ियाँ-बूड़ियाँ हों तो पहन लो। उस वक्त माँ उत्तर देते हुए यह वाक्य कहती है।
स्पष्टीकरण : मिस्टर शामनाथ के घर पर चीफ़ की दावत है। शामनाथ और उनकी पत्नी जोर शोर से तैयारियाँ कर रहे हैं। इस दावत से अंग्रेज चीफ़ साहब के खुश होने पर शामनाथ को तरक्की की संभावना थी। लेकिन एक समस्या आ गई – माँ का क्या होगा? माँ गाँव की रहनेवाली अनपढ़ और अंग्रेजी रीतिरिवाज़ नहीं जानती थीं। शामनाथ ने अपनी माँ को सफेद कमीज़ और सफेद शलवार पहनने के लिए कहा। उसने अपनी माँ से चूड़ियाँ पहनने के लिए भी कहा। उस समय माँ उपरोक्त कथन कहती हैं कि सब जेवर तुम्हारी पढ़ाई में ही बिक गथे।

प्रश्न 3.
‘मेरी माँ गाँव की रहनेवाली हैं। उमर-भर गाँव में रही हैं।
उत्तर:
प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘चीफ़ की दावत’ नामक पाठ से लिया गया है जिसके लेखक डॉ. भीष्म साहनी हैं।
संदर्भ : अपने साहब से शामनाथ अंग्रेजी में बोले – मेरी माँ गाँव की रहने वाली हैं। उमर भर गाँव में रही है इसलिए लजाती है।
स्पष्टीकरण : मिस्टर शामनाथ के घर पर शाम को चीफ़ की दावत थी। सुबह से शामनाथ और उनकी पत्नी ने खूब तैयारियाँ कीं। चीफ़ साहब एक अंग्रेज़ थे। शामनाथ की एक ही चिन्ता थी – माँ अंग्रेजी रीति-रिवाज नहीं जानती थीं, अनपढ़ थीं। यदि चीफ़ साहब की भेंट माँ से हुई तो क्या किया जाए? फिर भी माँ को अच्छे कपड़े पहनाकर उन्हें कुछ हिदायतें देकर उसके कमरे के बाहर कुर्सी पर बिठाते हैं। लेकिन जो डर था वही हुआ। ड्रिंक पार्टी समाप्त कर जैसे ही वे खाने के लिए बरामदे में पहुंच रहे थे, माँ कुर्सी पर सोकर जोर से खरटि ले रही थीं। माँ को देखते ही देसी अफसरों की स्त्रियाँ हँस पड़ी। माँ हड़बड़ाकर उठ बैठीं। चीफ़ साहब ने उन्हें नमस्ते किया। तब शामनाथ अपनी माँ का परिचय देते हुए यह वाक्य चीफ से कहते हैं।

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प्रश्न 4.
‘क्यों, माँ, साहब को फुलकारी बहुत पसंद हैं, इन्हें एक ऐसी फुलकारी बना दोगी न।
उत्तर:
प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘चीफ़ की दावत’ नामक पाठ से लिया गया है जिसके लेखक डॉ. भीष्म साहनी हैं।
संदर्भ : जब चीफ़ साहब ने फुलकारी देखी और पसंद की, तो शामनाथ ने अपनी माँ से यह वाक्य कहा। – स्पष्टीकरण : साहब बड़ी रूचि से फुलकारी देखते है। पुरानी फुलकारी थी। जगह-जगह से उसके धागे निकले थे, कपड़ा भी फटनेलगा था। साहब की रूचि देखकर शामनाथ ने कहा यह फटी हुई है, साहब मैं आपको नई बनवा दूंगा! क्यों, माँ, साहब को एक ऐसी ही फुलकारी बना दोगी न?

प्रश्न 5.
‘ओ अम्मी! तुमने तो आज रंग ला दिया।
उत्तर:
प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘चीफ़ की दावत’ नामक पाठ से लिया गया है जिसके लेखक डॉ. भीष्म साहनी हैं।
संदर्भ : इस वाक्य को शामनाथ ने अपनी माँ से कहा।
स्पष्टीकरण : शामनाथ के घर पर चीफ़ की दावत थी। चीफ़ साहब इस पार्टी से खुश हुए तो शामनाथ को तरक्की मिलने की संभावना थी। शामनाथ और उनकी पत्नी जोर-शोर से तैयारियाँ करते हैं। उन दोनों के लिए एक ही चिन्ता का विषय है – माँ। शामनाथ की माँ गाँव की रहनेवाली हैं, अंग्रेजी रीतिरिवाजों से अपरिचित थीं। यदि चीफ़ साहब की भेंट माँ से हुई तो, अथवा देसी अफसर, उनकी स्त्रियाँ माँ को देखकर हँसने लगे तो किया धरा मिट्टी में मिल जाएगा। लेकिन चीफ़ साहब माँ से बहुत खुश हो जाते हैं। उनसे पंजाबी लोक गीत गवाते हैं और ‘फुलकारी’ बनाकर देने के लिए कहकर पार्टी से खुश होकर लौट जाते हैं। शामनाथ को सबसे ज्यादा संतोष होता है। अपनी माँ की कोठरी में जाकर ‘अम्मी’ को गले लगाकर कहते हैं “ओ अम्मी! तुमने तो आज रंग ला दिया।’

प्रश्न 6.
‘जानती नहीं, साहब खुश होगा, तो मुझे तरक्की मिलेगी?’
उत्तर:
प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘चीफ़ की दावत’ नामक पाठ से लिया गया है जिसके लेखक डॉ. भीष्म साहनी हैं।
संदर्भ : इस वाक्य को शामनाथ ने अपनी माँ से कहा कि साहब खुश होंगे तो मेरी तरक्की होगी।
स्पष्टीकरण : चीफ़ साहब के चले जाने के बाद शामनाथ खुशी से झूमते हुए माँ को आलिंगन में भर लिया। माँ तुमने तो रंग ला दिया। साहब तुमसे इतना खुश हुए कि क्या कहूँ। माँ साहब को खुश रखेगें, तो मुझे तरक्की भी मिलेगी।

प्रश्न 7.
‘तो मैं बना दूंगी, बेटा, जैसे बन पड़ेगा, बना दूंगी।’
उत्तर:
प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘चीफ़ की दावत’ नामक पाठ से लिया गया है जिसके लेखक डॉ. भीष्म साहनी हैं।
संदर्भ : जब बेटे शामनाथ ने अपनी माँ से आग्रह करते हुए कहा, तब माँ ने बेटे से यह वाक्य कहा।
स्पष्टीकरण : पुरानी फुलकारी दिखाने पर अंग्रेज चीफ़ को फुलकारी पसंद आई। वैसी ही फुलकारी बनाकर देने के लिए जब बेटे ने माँ से आग्रह किया, तब माँ ने बेटे से उक्त वाक्य कहा। वह जैसे-तैसे फुलकारी बनाकर देने के लिए मान जाती है।

V. वाक्य शुद्ध कीजिए :

प्रश्न 1.
आज मि. शामनाथ के घर चीफ़ का दावत है।
उत्तर:
आज मि. शामनाथ के घर चीफ़ की दावत है।

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प्रश्न 2.
मेहमान लोग आठ बजे आएगा।
उत्तर:
मेहमान लोग आठ बजे आएगें।

प्रश्न 3.
तुम्हारे खर्राटों की आवाज़ दूर तक जाता है।
उत्तर:
तुम्हारे खर्राटों की आवाज़ दूर तक जाती है।

प्रश्न 4.
माँ धीरे से उठीं और अपना कोठरी में चली गयीं।
उत्तर:
माँ धीरे से उठीं और अपनी कोठरी में चली गयीं।

प्रश्न 5.
चीफ़ के चेहरे पर मुस्कुराहट था।
उत्तर:
चीफ़ के चेहरे पर मुस्कुराहट थी।

VI. अन्य लिंग रूप लिखिए :

श्रीमान, विधवा, साहब, लड़का, बूढ़ा।

  1. श्रीमान – श्रीमती
  2. विधवा – विधुर
  3. साहब – साहिबा
  4. लड़का – लड़की
  5. बूढ़ा – बुढ़िया

VII. अन्य वचन रूप लिखिए :

कुर्सी, चूड़ी, गुडिया, कोठरी, मौका।

  1. कुर्सी – कुर्सियाँ
  2. चूड़ी – चूड़ियाँ
  3. गुडिया – गुडियाँ
  4. कोठरी – कोठरियाँ
  5. मौका – मौके

चीफ़ की दावत लेखक परिचय :

भीष्म साहनी प्रगतिशील कहानीकार हैं। आपका जन्म 1915 ई. को रावलपिंडी में हुआ था। लाहौर से अंग्रेजी में एम.ए. करने के पश्चात आपने पंजाब विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। आप दिल्ली कालेज में अंग्रेजी के वरिष्ठ प्रवक्ता के पद पर कार्यरत रहे। आपकी विचार दृष्टि राष्ट्रीय एवं समाज परक थी। मध्यमवर्गीय परिवारों की समस्याओं और विसंगतियों को आपने प्रभावशाली ढंग से चित्रित किया है। यांत्रिक जीवन के तनाव, व्यक्ति की स्वार्थ भावना, विभाजन की पीड़ा, राजनैतिक जीवन, भ्रष्टाचार आदि आपकी कहानियों के विषय बने और इनके विश्लेषण के द्वारा भीष्म साहनी ने सामाजिक बदलाव एवं मानव स्वभाव में परिवर्तन लाने का प्रयत्न किया। आपकी मृत्यु 11 जुलाई 2003 ई. को हुई।

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आपकी प्रसिद्ध रचनाओं में ‘बसन्ती’ और ‘तमस’ बहुचर्चित उपन्यास हैं। ‘पहला पाठ’, ‘भाग्यरेखा’, ‘मेरी प्रिय कहानियाँ’ आदि कहानी संकलन हैं। ‘तमस’ को साहित्य अकादमी द्वारा 1975 में पुरस्कृत किया गया।

चीफ़ की दावत पाठ का आशय :

प्रस्तुत कहानी में वृद्धों की समस्याएँ, समाज का दिखावापन तथा मनुष्य की उधेड़बुन वर्णित है। शामनाथ के घर पर चीफ़ की दावत में जो घटनाएँ घटती हैं उनसे पता चलता है कि जो माँ पार्टी के लिए बाधा समझी जाती थी उसी के कारण शामनाथ को तरक्की मिलने की सम्भावना हुई।
बुजुर्गों के प्रति आदरभाव रखने तथा माँ की ममता का परिचय देने हेतु इस कहानी का चयन किया गया है।

चीफ़ की दावत Summary in Hindi

चीफ़ की दावत मिस्टर शामनाथ के घर पर थी। शामनाथ और उनकी श्रीमती मेहमानों के आगमन के लिए अपने घर में सभी प्रकार की तैयारियाँ करने लगे। साफ-सफाई, टेबल-कुर्सियाँ, तिपाइयाँ, नेपकिन, फूल आदि बरामदे में पहुँच गये। ड्रिंक की व्यवस्था की गई। कमरे की सजावट की गई।

शामनाथ को इस बात की चिंता सता रही थी कि यदि मेहमान आ जाएँगे, तो माँ का क्या होगा? उन्हें कहाँ छुपाएँ? चीफ के सामने उनकी उपस्थिति पति-पत्नी को अच्छी नहीं लगती थी। क्योंकि उनकी माँ जब सोती है, तो जोर-जोर से खर्राटों की आवाज आती है। इसलिए उन्हें कमरे में बंद कर दिया जाय अथवा पिछवाड़े वाली सहेली के यहाँ भेज दिया जाय।

बहू और बेटे के इस तरह के व्यवहार माँ कुछ उदास थी, परन्तु बेटे से कुछ नहीं कहती है। सब कुछ सहन कर जाती है। पत्नी के कारण वह माँ की उपेक्षा भी कर देता है। आखिर चीफ़ साहब आ ही गए। माँ को अव्यवस्थित रूप में देखकर शामनाथ को क्रोध आया।

चीफ के आते ही माँ हड़बड़ाकर उठ बैठी। सिर पर पल्ला रखते हुए खड़ी हो गई। वह सकुचाती हुई काँप रही थीं। चीफ़ के चेहरे पर मुस्कराहट थी। उसने माँ को नमस्ते कहा। हाथ मिलाने के लिए कहा। माँ घबरा गई। देसी अफसरों की स्त्रियाँ हँस पड़ी। दोनों ने अंग्रेजी में ‘हाउ डू यू डू?’ कहा। चीफ को गाँव के लोग बहुत पसंद थे। उसको कमरे की सजावट अच्छी लगी। यहाँ तक कि फुलकारी देने तक कह दिया। चीफ़ ने माँ से गाना भी सुना। वे बहुत खुश थे।
शामनाथ इन सारी बातों से माँ पर रीझ गए। कुछ हद तक अनादर की भावना मिट गई। चीफ़ की खुशामदी से उसे तरक्की होनेवाली थी। चीफ़ के लिए माँ फुलकारी बनाकर देने के लिए तैयार हो गई। मेहमानों के जाने के बाद शामनाथ झूमते हुए आए और माँ को आलिंगन में भर लिया | “ओ मम्मी! तुमने आज रंग ला दिया | ” कहते हुए खुशी जाहिर की | उसने कहा – माँ, साहब तुमसे बहुत खुश हुए। माँ की काया बेटे के आलिंगन में छिप गई।

चीफ़ की दावत Summary in Kannada

चीफ़ की दावत Summary in Kannada 1
चीफ़ की दावत Summary in Kannada 2
चीफ़ की दावत Summary in Kannada 3
चीफ़ की दावत Summary in Kannada 4
चीफ़ की दावत Summary in Kannada 5
चीफ़ की दावत Summary in Kannada 6

चीफ़ की दावत Summary in English

Shyamnath, eager to impress his boss and climb the corporate ladder, had invited his American boss and some senior colleagues for dinner. The dinner, in honour of the boss, was to be held in the house of Shyamnath. Shyamnath and his wife began to make preparations for the arrival of the guests. Chairs, a table, stools, napkins, and flowers had all arrived on the verandah. The drinks had been arranged in the sitting room. Now all unnecessary domestic articles were being hidden behind cupboards and under beds.

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Suddenly an obstacle appeared before Shyamnath: What to do with mother? Neither he nor his capable wife had directed their attention to this matter. He thought it would be a severe embarrassment for him and a dampener on the party if the guests, especially his American boss, chanced upon her. He wondered what he could do to keep her away from the guests.

The behaviour of her son and daughter-in-law made the mother sad but she never said anything to her son. She endured everything. Sometimes, because of his wife, Shyamnath had even insulted her. But she said nothing and agreed to whatever he asked her to do.

Eventually, the boss arrived at Shyamnath’s house. Soon Shyamnath’s party had begun to touch the summit of success. The conversation was flowing as swiftly as the glasses were being filled. And in this flow of drinking and offering drinks, the clock struck half-past ten. Finally, everyone drained the last drops of their glasses, rose for dinner, and left the sitting room. Shyamnath was in front, showing the way, behind him the boss and the other guests.

Stepping on the verandah, Shyamnath suddenly stopped dead. What he saw made him stumble, and in a moment his intoxication took flight. On the verandah, right in front of her room, his mother was sitting on her chair just as she had been. But both her feet were on the seat of the chair, and her head was lolling from side to side, and from her mouth issued loud snores. The moment he saw her, Shyamnath was enraged. He felt like dragging her to her feet and shoving her into her room, but this was not possible; the boss and the other guests were standing nearby.

When they saw his mother, some of the wives of the Indian officials began to giggle. At once mother hastily sat up straight. Seeing so many people in front of her she was so alarmed she could say nothing. She immediately pulled her dupatta over her head, stood up, and began to stare at the ground. There was a smile on the boss’s face. He greeted his mother. He then stretched out his right hand for a mother to shake. Mother was even more alarmed. In her confusion, she put her left hand in the Sahibs. Shyamnath was annoyed. The wives of the Indian officers tittered.

The sahib took control of the situation. The atmosphere became less tense. People began to laugh and joke with one another. Shyamnath began to feel slightly less agitated. The sahib even enjoyed a song that the mother sang. He just wouldn’t stop clapping. Shyamnath’s annoyance turned into joy and pride. His mother had brought a new colour to the party.

Next, the sahib enquired as to how phulkaris are made. Shyamnath promised to get his mother to stitch one for him. The sahib thanked him and made his way towards the dining table. When they had sat down and everyone’s eyes had turned from her, the old lady slowly stood up and, avoiding notice, went into her room. The moment she sat down there, her eyes flooded with tears. She wiped them with her dupatta, took the name of God, and prayed for long life for her son.

Once the guests had eaten and left, Shyamnath came to his mother’s room and embraced her. He said that the sahib was impressed and that she had done wonders that night. Tears welled up in her eyes. Then the mother said that she wanted to go to Haridwar. Suddenly Shyamnath’s anger began to build up. He said that he did not want her to go to Haridwar and be disgraced by people that he had sent her away as he did not want to take care of her.

He then reminded her about the phulkari which he had promised his boss. He said that if they made the sahib happy, then he would probably be given a better job. Hearing this there was a glow on her face. She agreed to do it for him. And in her heart she again longed for a bright future for her son.

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कठिन शब्दार्थ :

  • फेहरिस्त – सूची, तालिका;
  • मुकम्मल – पूरा किया हुआ;
  • सुभीते – सुगमता, सहूलियत;
  • उधेड़बुन – ऊहापोह, सोच-विचार;
  • खड़ाऊँ – पादुका;
  • तरतीब – क्रमानुसार;
  • तिनककर – बिगड़कर;
  • लंडूरा – कटी हुई पूँछ वाला पशु (बेकार, निकम्मा);
  • हिमायत – तरफदारी;
  • लरजती – काँपती, हिलती;
  • दस्तकारी – हाथ की कारीगरी;
  • फुलकारी – साधारण मलमल पर रंगीन रेशम से बूटियाँ काढ़ा हुआ कपड़ा;
  • खिदमत – सेवा, शुश्रूषा;
  • टप्पे – एक प्रकार का लोक गीत।

मुहावरे :

  • टाँग अड़ाना – बाधा डालना;
  • आँखें फाड़े देखना – चकित होकर देखना;
  • दिल बैठ जाना – व्याकुल होना;
  • रंग बदलना – स्वभाव बदलना।
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